जनरल क़ासिम सुलैमानी उस अलक़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर है जिसके ज़िम्मे विदेशी मिशन रहते हैं। 90 मिनट के इंटरव्यू में जनरल क़ासिम सुलैमानी ने बताया कि 34 दिनों तक चलने वाले इस युद्ध के दौरान किस तरह वह लेबनान पहुंचे और पूरे युद्ध में वहीं मोर्चों पर मौजूद रहे।
जनरल कासिम सुलैमानी ने बताया कि युद्ध जब शुरू हुआ तो वह सीरिया के रास्ते लेबनान पहुंचे और उनके साथ हिज़्बुल्लाह के विश्व विख्यात कमांडर और सामरिक स्ट्रैटेजिस्ट जनरल एमाद मुग़निया थे जिन्हें वर्ष 2008 में इस्राईल ने कार बम धमाके में शाहीद कर दिया था। एमाद मुग़निया को हिज़्बुल्लाह उस कमांडर के रूप में देखता है जिसने इस्राईल को इस युद्ध में नाकों चने चबवाए।
जनरल क़ासिम सुलैमानी ने उस घटना के बारे में बात की जो युद्ध की आग भड़क उठने का कारण बनी थी। घटना यह थी कि हिज़्बुल्ला ने इस्राईल की बकतरबंद गाड़ी पर हमला करके दो इस्राईली सैनिकों को क़ैदी बना लिया था।
जनरल क़ासिम सुलैमानी ने बताया कि लेबनान में वह एक हफ़्ता रुके उसके बाद ईरान वापस गए ताकि लेबनान के हालात से सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई को अवगत करवाएं। जनरल क़ासिम सुलैमानी ईरान से उसी दिन दोबारा लेबनान पहुंच गए और अपने साथ हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह के लिए सुप्रीम लीडर का संदेश ले गए। इसके बाद वह युद्ध समाप्त होने तक लेबनान के मोर्चों पर मौजूद रहे।
इस इंटरव्यू में जनरल सुलैमानी ने बताया कि वह किस तरह एमाद मुग़निया के साथ साथ रहे और रात के समय सैयद हसन नसरुल्लाह के साथ उनकी बैठकें होती थीं।
जनरल क़ासिम सुलैमानी ने बताया कि एक रात दक्षिणी बैरूत पर जब इस्राईल की ओर से बेहद भीषण बमबारी हो रही थी तो उन्होंने और एमाद मुग़निया ने सैयद हसन नसरुल्लाह को सैन्य आप्रेशन रूप से एक अन्य स्थान पर पहुंचाया और फिर बार बार जगह बदलते रहे और बाद में आप्रेशन कमांड रूम में वापसी हुई।
इससे पहले ईरान के सरकारी टीवी से सैयद हसन नसरुल्लाह का इंटरव्यू पांच भागों में प्रसारित हो चुका है।